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मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर// muhavre aur lokokti mein antar

मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर//muhavre aur lokokti mein antar



मुहावरे और लोकोक्ति में क्या-क्या अंतर होता है? परिभाषा और उदाहरण सहित



मुहावरे तथा लोकोक्ति में अंतर बताइए, लोकोक्ति तथा मुहावरे में अंतर बताइए
मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर

difference between muhavare and lokokti with example in Hindi




मुहावरे की परिभाषा-


जब कोई वाक्यांश अपने सामान अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में रुढ़ हो जाता है तो उसे मुहावरा कहते हैं। अथवा जब कोई शब्द समूह पद या वाक्यांश निरंतर अभ्यास के कारण सामान्य अर्थ न देकर विशेष अर्थ व्यक्त करने लगे तो उसे मुहावरा कहते हैं।



उदाहरण- 


👉अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि से काम न लेना


👉आंखों से गिरना- आदर कम होना



लोकोक्ति की परिभाषा-


लोकोक्ति का अर्थ है लोक में प्रचलित हुआ है कथन अथवा उक्ति जो व्यापक लोग अनुभव पर आधारित हो और लोकोक्ति में लौकिक सामाजिक जीवन का अंत सत्य विद्यमान रहता है लोकोक्ति में गागर में सागर जैसा भाव रहता है लोकोक्ति कहने के लिए उचित प्रसंग की पहचान आवश्यक है।



उदाहरण-


👉 आम के आम गुठलियों के दाम- दोहरा लाभ होना


👉उल्टा चोर कोतवाल को डांटे- अपराधी का निर्दोष पर हावी होना




मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर difference between muhavare and lokokti 




•लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है जबकि मुहावरा वाक्य का अंश होता है।


•लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जो भूतकाल का लोक अनुभव होती है जबकि मुहावरा अपने रूढ़ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है।


•पुणे इकाई होने के कारण लोकोक्ति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता जबकि मुहावरों में वाक्य अनुसार परिवर्तन होता है।


•पूर्वक होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र और अपने आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है जबकि मुहावरा किसी वाक्य का अंश बनकर आता है।


•लोकोक्ति तथा मुहावरे में उपयोगिता की दृष्टि से भी पर्याप्त अंतर है लोकोक्ति किसी बात का समर्थन विरोध अथवा खंडन करने के लिए प्रयोग में ली जाती है।


• मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अंत आरंभ और बीच में कहीं भी किया जा सकता है जबकि लोकोक्ति एक संपूर्ण वाक्य है।



लोकोक्ति किसे कहते हैं?



किसी भी समृद्ध भाषा में कुछ ऐसे वाक्य प्रयोग किए जाते हैं जो ना केवल माता के सुंदर को बढ़ा देते हैं बल्कि वाक्य के समान अर्थ को पूर्ण स्पष्ट और प्रभावशाली बना देते हैं। लोकोक्तियां या कहावतों का प्रयोग भी इसी संदर्भ में किया जाता है। लोकोक्तियां वास्तव में किसी विशेष स्थान पर मशहूर हो जाने वाले कथन होते हैं जिनका प्रयोग करके अपने वाक्य अपनी बात पर विशेष जोर दिया जाता है। लोकोक्तियां बहुत ज्यादा प्रचलित और लोगों के मुंह में गले वाक्य होते हैं। यह आम जनमानस द्वारा स्थानीय बोलियों में हर दिन की परिस्थितियों से उपज ने वाले वाक्य होते हैं जो किसी खास समूह या वर्ग या क्षेत्र में प्रयोग में लाए जाते हैं। लोकोक्ति गागर में सागर भरने की क्षमता होती है यह कथन के भाव को और भी ज्यादा चित्रित और स्पष्ट कर देता है।



लोकोक्ति की परिभाषा- 


लोकोक्ति अर्थात लोग और उठती यानी किसी विशेष स्थान पर आम जनमानस द्वारा प्रयुक्त युक्ति या कथन-


 डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल के अनुसार- 


"लोकोक्तियां मानवीय ज्ञान के चौथे और छपते हुए सूत्र हैं"


लोकोक्तियां या कहावत में स्थान विशेष के भूगोल, संस्कृति और भाषाओं के मिश्रण के दर्शन होते हैं। यह अपने आप में वाक्यांश ना होकर स्वतंत्र वाक्य होते हैं। लोकोक्तियों में आमजन के अनुभव का निचोड़ या सर मिलता है। लोकोक्तियां या कहावतों के रचनाकार प्राया अज्ञात होते हैं लोकोक्ति को कहावत या सूक्ति भी कहा जाता है।


उदाहरण- 


अंधों में काना राजा- 


अर्थ- अज्ञानियों के बीच थोड़ा ज्ञानी


प्रयोग- गांव में कोई पढ़ा लिखा नहीं था ।जब पांचवी कक्षा पास मोहन शहर से आया तो गांव में उसकी खूब धाक हो गई ।सच में अंधों में काना राजा होता है।



अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता


अर्थ- किसी बड़े काम के लिए अकेला आदमी काफी नहीं होता।


प्रयोग- भ्रष्टाचार के विरुद्ध तुम अकेले लाख आवाजें उठा लो पर कुछ होने वाला नहीं है।

 तुमको मालूम है ना अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।



मुहावरे क्या होते हैं?


मुहावरे किसी भाषा का श्रंगार होते हैं यह भाषा को सुंदर, कलात्मक, सुदृढ़ ,गतिशील और रोचक बनाते हैं। मुहावरे भाषा और वाक्य को स्पष्ट और चित्रमय में बनाते हैं। मुहावरे किसी ना किसी व्यक्ति के अनुभव पर आधारित होते हैं। मुहावरों के शब्दों की अपनी अहमियत होती है और यह ज्यों के त्यों वाक्य में प्रयुक्त होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मुहावरों में प्रयुक्त शब्दों को उन्हीं के पर्यायवाची शब्दों से बदलकर प्रयोग किया जाए तो ना केवल उसकी खूबसूरती समाप्त हो जाती है बल्कि उनके अर्थ भी बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए पानी पानी होना की जगह जल जल होना प्रयोग करें तो वह कि का सुंदर और भाव दोनों समाप्त हो जाएगा।



मुहावरे वास्तव में एक पूर्ण वाक्य ना होकर वाक्यांश होते हैं। यह किसी वाक्य में प्रयोग तो होकर ही पाक को रोचक और प्रभावशाली बनाते हैं।



मुहावरे की परिभाषा- 


सरल शब्दों में कहा जाए तो ऐसे सू संगठित शब्द समूह जिनमें लक्ष्णाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है मुहावरा कहलाते हैं। यह शब्द समूह कई बार व्यंगात्मक भी हो सकते हैं मुहावरे किसी भाषा को जीवंत, रंगीन और सरस बना देती है। इसके प्रयोग से भाषा प्रभावशाली गतिशील और रोचक बन जाती है।



डॉ उदित नारायण तिवारी ने मुहावरों की परिभाषा देते हुए कहा है-


"हिंदी उर्दू में लक्षण अथवा व्यंजना द्वारा सिद्ध वाक्य को ही मुहावरा कहते हैं।"


 उदाहरण- 


चैन की बंसी बजाना-


अर्थ- चिंता मुक्त जीवन बिताना


प्रयोग- एक बार मैं नौकरी पर आ जाऊं फिर तो उसके बाद चैन की बंसी बजाना ही है।



टेढ़ी खीर होना-


अर्थ- मुश्किल कार्य होना


प्रयोग- लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना एक आम इंसान के लिए टेढ़ी खीर है।



सिर पर चढ़ना- 

मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर//difference between muhavare and lokokti in Hindi


मुहावरे और लोकोक्ति में क्या-क्या अंतर होता है परिभाषा और उदाहरण सहित difference between muhavare and lokokti with example in Hindi



मुहावरे की परिभाषा-


जब कोई वाक्यांश अपने सामान अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में रुढ़ हो जाता है तो उसे मुहावरा कहते हैं। अथवा जब कोई शब्द समूह पद या वाक्यांश निरंतर अभ्यास के कारण सामान्य अर्थ न देकर विशेष अर्थ व्यक्त करने लगे तो उसे मुहावरा कहते हैं।



उदाहरण- 


👉अक्ल पर पत्थर पड़ना - बुद्धि से काम न लेना


👉आंखों से गिरना- आदर कम होना



लोकोक्ति की परिभाषा- लोकोक्ति का अर्थ है लोक में प्रचलित हुआ है कथन अथवा उक्ति जो व्यापक लोग अनुभव पर आधारित हो और लोकोक्ति में लौकिक सामाजिक जीवन का अंत सत्य विद्यमान रहता है लोकोक्ति में गागर में सागर जैसा भाव रहता है लोकोक्ति कहने के लिए उचित प्रसंग की पहचान आवश्यक है।


उदाहरण-


👉 आम के आम गुठलियों के दाम- दोहरा लाभ होना


👉उल्टा चोर कोतवाल को डांटे- अपराधी का निर्दोष पर हावी होना


मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर difference between muhavare and lokokti 


•लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है जबकि मुहावरा वाक्य का अंश होता है।


•लोकोक्ति लोक में प्रचलित उक्ति होती है जो भूतकाल का लोक अनुभव होती है जबकि मुहावरा अपने रूढ़ अर्थ के लिए प्रसिद्ध होता है।


•पुणे इकाई होने के कारण लोकोक्ति में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता जबकि मुहावरों में वाक्य अनुसार परिवर्तन होता है।


•पूर्वक होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र और अपने आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है जबकि मुहावरा किसी वाक्य का अंश बनकर आता है।


•लोकोक्ति तथा मुहावरे में उपयोगिता की दृष्टि से भी पर्याप्त अंतर है लोकोक्ति किसी बात का समर्थन विरोध अथवा खंडन करने के लिए प्रयोग में ली जाती है।


• मुहावरे का प्रयोग वाक्य के अंत आरंभ और बीच में कहीं भी किया जा सकता है जबकि लोकोक्ति एक संपूर्ण वाक्य है।


लोकोक्ति किसे कहते हैं?


किसी भी समृद्ध भाषा में कुछ ऐसे वाक्य प्रयोग किए जाते हैं जो ना केवल माता के सुंदर को बढ़ा देते हैं बल्कि वाक्य के समान अर्थ को पूर्ण स्पष्ट और प्रभावशाली बना देते हैं। लोकोक्तियां या कहावतों का प्रयोग भी इसी संदर्भ में किया जाता है। लोकोक्तियां वास्तव में किसी विशेष स्थान पर मशहूर हो जाने वाले कथन होते हैं जिनका प्रयोग करके अपने वाक्य अपनी बात पर विशेष जोर दिया जाता है। लोकोक्तियां बहुत ज्यादा प्रचलित और लोगों के मुंह में गले वाक्य होते हैं। यह आम जनमानस द्वारा स्थानीय बोलियों में हर दिन की परिस्थितियों से उपज ने वाले वाक्य होते हैं जो किसी खास समूह या वर्ग या क्षेत्र में प्रयोग में लाए जाते हैं। लोकोक्ति गागर में सागर भरने की क्षमता होती है यह कथन के भाव को और भी ज्यादा चित्रित और स्पष्ट कर देता है।



लोकोक्ति की परिभाषा- 

लोकोक्ति अर्थात लोग और उठती यानी किसी विशेष स्थान पर आम जनमानस द्वारा प्रयुक्त युक्ति या कथन-


 डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल के अनुसार- 


"लोकोक्तियां मानवीय ज्ञान के चौथे और छपते हुए सूत्र हैं"


लोकोक्तियां या कहावत में स्थान विशेष के भूगोल, संस्कृति और भाषाओं के मिश्रण के दर्शन होते हैं। यह अपने आप में वाक्यांश ना होकर स्वतंत्र वाक्य होते हैं। लोकोक्तियों में आमजन के अनुभव का निचोड़ या सर मिलता है। लोकोक्तियां या कहावतों के रचनाकार प्राया अज्ञात होते हैं लोकोक्ति को कहावत या सूक्ति भी कहा जाता है।


उदाहरण- 


अंधों में काना राजा- 


अर्थ- अज्ञानियों के बीच थोड़ा ज्ञानी


प्रयोग- गांव में कोई पढ़ा लिखा नहीं था ।जब पांचवी कक्षा पास मोहन शहर से आया तो गांव में उसकी खूब धाक हो गई ।सच में अंधों में काना राजा होता है।



अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता


अर्थ- किसी बड़े काम के लिए अकेला आदमी काफी नहीं होता।


प्रयोग- भ्रष्टाचार के विरुद्ध तुम अकेले लाख आवाजें उठा लो पर कुछ होने वाला नहीं है।

 तुमको मालूम है ना अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता।



मुहावरे क्या होते हैं?


मुहावरे किसी भाषा का श्रंगार होते हैं यह भाषा को सुंदर, कलात्मक, सुदृढ़ ,गतिशील और रोचक बनाते हैं। मुहावरे भाषा और वाक्य को स्पष्ट और चित्रमय में बनाते हैं। मुहावरे किसी ना किसी व्यक्ति के अनुभव पर आधारित होते हैं। मुहावरों के शब्दों की अपनी अहमियत होती है और यह ज्यों के त्यों वाक्य में प्रयुक्त होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो मुहावरों में प्रयुक्त शब्दों को उन्हीं के पर्यायवाची शब्दों से बदलकर प्रयोग किया जाए तो ना केवल उसकी खूबसूरती समाप्त हो जाती है बल्कि उनके अर्थ भी बदल जाते हैं। उदाहरण के लिए पानी पानी होना की जगह जल जल होना प्रयोग करें तो वह कि का सुंदर और भाव दोनों समाप्त हो जाएगा।



मुहावरे वास्तव में एक पूर्ण वाक्य ना होकर वाक्यांश होते हैं। यह किसी वाक्य में प्रयोग तो होकर ही पाक को रोचक और प्रभावशाली बनाते हैं।



मुहावरे की परिभाषा- 


सरल शब्दों में कहा जाए तो ऐसे सू संगठित शब्द समूह जिनमें लक्ष्णाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है मुहावरा कहलाते हैं। यह शब्द समूह कई बार व्यंगात्मक भी हो सकते हैं मुहावरे किसी भाषा को जीवंत, रंगीन और सरस बना देती है। इसके प्रयोग से भाषा प्रभावशाली गतिशील और रोचक बन जाती है।



डॉ उदित नारायण तिवारी ने मुहावरों की परिभाषा देते हुए कहा है-


"हिंदी उर्दू में लक्षण अथवा व्यंजना द्वारा सिद्ध वाक्य को ही मुहावरा कहते हैं।"


 उदाहरण- 


चैन की बंसी बजाना-


अर्थ- चिंता मुक्त जीवन बिताना


प्रयोग- एक बार मैं नौकरी पर आ जाऊं फिर तो उसके बाद चैन की बंसी बजाना ही है।



टेढ़ी खीर होना-


अर्थ- मुश्किल कार्य होना


प्रयोग- लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करना एक आम इंसान के लिए टेढ़ी खीर है।



सिर पर चढ़ना- 


अर्थ- अनुशासन हीन होना


प्रयोग-अब क्यों पछताते हो जब बेटे को सिर चढ़ा रहे थे तब तो खूब अच्छा लग रहा था ना।

अर्थ- अनुशासन हीन होना


प्रयोग-अब क्यों पछताते हो जब बेटे को सिर चढ़ा रहे थे तब तो खूब अच्छा लग रहा था ना।




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